Monday, February 22, 2010

उस पार की जमीन

॥ उस पार की जमीन॥

बच्चे के पास
नहीं है कोई जेट विमान
कोई रॉकेट
या हवाई सर्वेक्षण करता
कोई हैलिकौप्टर।

उसके पास है
प्यार की डोरी में बंधी
एक पतंग
उड़ते-उड़ते पहुंच गई जो
सरहद पार के आसमान में
बांट रही
एक अदद मुस्कान।

कोई शक की नजरों
नहीं देखेगा उसे
सरहद पार।
न ही दागी जाएगी
कोई मिसाइल
उसे गिराने को।

कोई बच्चे जैसा बच्चा
सरहद पार का
निहारेगा उसे
तालियां बजाएगा
खिलखिलाएगा।

कटकर जाएगी जब
तो वह उमंगों भर जाएगा
लूटने को दोनों हाथ फैलाएगा।
और इस प्रकार
भर जाएगी मुस्कान से
सरसब्ज हो जाएगी प्यार से
उस पार की जमीन।

7 comments:

naresh said...

Bhai,Satyanaryan Payar bhra Nameskar.
Payari si baccho si muskan Abhi-Abhi mainye pdhi.Us par ki jemin m Aapne petang dewra jo chitren kiya h serhed k us par or serhed k is par petang or baccho ko dono ko beda nirbhik or mast dikhya h.
Aap ki bhut acchi soch h.bhut hi sarthek kavita likhte ho.
Ret k dhoro ki terh bilkul saaf si kavita k liye Aap ko sadh-bad.
NARESH MEHAN

दीनदयाल शर्मा said...

उस पार की जमीन ...शीर्षक से भाई सत्यनारायण ने बहुत ही सुन्दर कविता लिखी है.हमने एक दूसरे के बीच भी सरहद बना रखी है. बाल मन से जुड़ी इस कविता लिए हार्दिक बधाई. दीनदयाल शर्मा,
Mob.09414514666, http://deendayalsharma.blogspot.com

Dimpal Maheshwari said...

आपके comment के लिए आभार....
बहुत सुन्दर रचना हैं....हमने सब कुछ तो सरहदों में बाँट दिया....पर मासूम बचपन को उनके अल्हड़पन को नही बाँट सकते...डिम्पल

CS Devendra K Sharma said...

patang ko lekar achi kalpana

हरकीरत ' हीर' said...

कटकर जाएगी जब
तो वह उमंगों भर जाएगा
लूटने को दोनों हाथ फैलाएगा।
और इस प्रकार
भर जाएगी मुस्कान से
सरसब्ज हो जाएगी प्यार से
उस पार की जमीन।

आपने तो सरहदों को पाट दिया ....बहुत खूब.....!!

Dimpal Maheshwari said...

जय श्री कृष्ण..आपको बधाई ....आपने बेहद खुबसूरत कवितायेँ लिखी हैं....मन को छू देने वाली....सरल और सहज.....हांजी हमने बधाई देने में बहुत देर कर दी...और आपका आभार...बस इसी प्रकार अपनी दुआएं साथ रखियेगा.....हम और ज्यादा अच्छा और दिल से लिखने का प्रयास करते रहेंगे....!!!!
---डिम्पल

.........................................Maitreya Manoj said...

Aapne "kavi karm ki shuruaat" se "us paar ki zameen" tak ki yatra me bachpan ko sambaale rakha he. Ye maasumiat hamesha yun hee muskuraati rahe, aapki kavita mein bhi aur zindgi me bhi...

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