Sunday, January 31, 2010

बेटी जब पंख फैलाती है

 ॥ बेटी जब पंख फैलाती है॥

जवान होता बेटा
जब उडारी भरने लगता है
दूर-दूर तक
तो मां-बाप के फख्र का
पार नहीं रहता।
और बेटी
जब पंख फैलाती है
तो मां-बाप के फिक्र का
पार नहीं रहता।

॥ त्रिभुज के बीच॥

विधायक की ड्योढ़ी के
ठीक सामने
इस ठिठुरती रात में
खुले आसमान तले
गाय, गोधे, और कुत्ते के
त्रिभुज के बीच
चिथड़ों में अपना बदन समेटे
पड़ी है एक मानव संतान।
यह भी तो
किसी मां की बेटी है।

॥ लड़की पतंग लूटना चाहती है॥

आसमान में
उड़ती पतंगों को
निहार रही है
छत पर खड़ी
गुडिय़ा-सी बिटिया।

दिख गया उसे
आसमान चीरता
एक हवाई जहाज।
बोली-
पापा,
हवाई जहाज ला दो ना!

विस्फारित नेत्रों
पढ़ा पिता ने
बेटी का चेहरा
और मुस्कराए।

बेटी ने गड़ा दीं आंखें
पिता की आंखों में,
ला दो ना पापा,
हम हवाई जहाज पर चढ़
पतंग लूटेंगे।

सचमुच,
लड़की पतंग लूटना चाहती है
वह भी
दौडऩा चाहती है
गलियों में उन्मुक्त।

अब मर्जी तुम्हारी।

॥ बेटी ने कलम उठाई तो...॥

उम्रभर लिखता रहा वह
प्रेमपत्र व प्रेम-कविताएं,

बेटी ने कलम उठाई तो
घर में बवाल हो गया।

7 comments:

दुलाराम सहारण said...

मंगलकामनाएं कवि सत्‍यनारायण सोनी को


कथाकार से परिचित थे, कवि से मिलकर अच्‍छा लगा।


धार आती रहेगी


सादर

skmeel said...

equality long live.

madan said...

kya bat h soniji
sundar rachav, badhai
madan gopal ladha

Shyam said...

jhakjhorti hue kavitaen sanvedanshunya logo ke ghron ko todti hue dikhai deti h.....congrats soni ji....keep up it

Shyam said...

ajay tumne behtreenkam kam kiya h yaar.....congrats.

naresh said...

Prem snehi,
Bhai,styanaryan.
Ram-Ram sa,
Aap ki havita beti Dil k aakhri konye k bhiter sama geyi.Bhut kosis kernye k bad bhi dil s nikel nahi rehi h.pata nahi knu betiya Baap ki dulari hoti h.
Aap ko is payri si kavita k liye dher sara asirbad.
NARESH MEHAN

paatee said...

kavitayen acchi lagi. badhai swikar kare. ummeed hai pustakakar me jaldi hi dekhneko milegi. subhkamnayen.
jagadeesh giri

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